पब्लिक मंच, डबवाली (रवि मोंगा)
डबवाली की मिट्टी से निकली आवाज ने एक बार फिर उत्तरी भारत में अपनी पहचान दर्ज कराई है। प्रसिद्ध रंगकर्मी, मोटिवेशनल स्पीकर और मंच संचालक संजीव शाद 30 दिन की लंबी सांस्कृतिक यात्रा पूरी कर रविवार को जब अपने गृह नगर लौटे, तो यह केवल एक वापसी नहीं, बल्कि उपलब्धियों से भरी गौरवपूर्ण यात्रा का समापन था।
उत्तर भारत के चार राज्यों-पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर-में आयोजित इस सांस्कृतिक अभियान के दौरान पटियाला, अमृतसर, फिरोजपुर, मोगा, बरनाला, डबवाली, ओढ़ा, मानसा, जम्मू, डोडा, किश्तवाड़ और गुलाबगढ़ जैसे प्रमुख शहर सांस्कृतिक रंग में रंगे नजर आए। हर मंच पर लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने अपने-अपने राज्यों की संस्कृति व परंपरा का अद्भुत नजारा पेश किया, जिसे हजारों-लाखों दर्शकों ने सराहा। इन आयोजनों में संजीव शाद सिर्फ मंच संचालक नहीं, बल्कि पूरे कार्यक्रम की आत्मा बनकर उभरे। उनकी दमदार आवाज, प्रभावशाली शैली और दर्शकों से सीधा संवाद-कार्यक्रमों को नई ऊंचाइयों तक ले गया। उन्होंने न केवल कलाकारों को मंच से जोड़ा, बल्कि दर्शकों को भी भारतीय लोक संस्कृति के साथ भावनात्मक रूप से जोड़े रखा। इस पूरे सांस्कृतिक सफर में उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनजेडसीसी), जम्मू-कश्मीर कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी और पंजाब सरकार का विशेष सहयोग रहा।
लोक संस्कृति के माध्यम से नजर आता है भारत का असली स्वरूप: शादयात्रा से लौटने उपरांत संजीव शाद ने कहा कि लोक संस्कृति से जुड़कर ही भारत के असली स्वरूप को समझा जा सकता है। इस यात्रा में विद्यार्थी और युवा वर्ग की भागीदारी विशेष रही, जिन्होंने मनोरंजन के साथ-साथ कला और साहित्य की सीख भी प्राप्त की। एनजेडसीसी, जम्मू-कश्मीर कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी और पंजाब सरकार द्वारा आयोजित अलग-अलग कार्यक्रमों ने 'एक भारत, श्रेष्ठ भारतÓ की भावना को साकार रूप में प्रस्तुत किया, जहां विभिन्न प्रदेशों की लोक परंपराएं एक मंच पर जीवंत होती नजर आईं।
पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय: वरच्युस क्लब
संजीव शाद की इस उल्लेखनीय यात्रा पर वरच्युस क्लब के संस्थापक केशव शर्मा, प्रधान हरदेव गोरखी, सचिव नरेश शर्मा, पीआरओ सोनू बजाज, प्रबंधक समिति एवं सदस्यों ने उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि संजीव शाद की यह यात्रा कार्यक्रमों में केवल मंच संचालन तक नहीं, बल्कि संस्कृति के प्रचार-प्रसार का एक सशक्त अभियान बनने में सफल रही। डबवाली जैसे छोटे शहर से निकलकर राष्ट्रीय मंचों पर अपनी पहचान बनाना न केवल संजीव शाद की व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है।

