पब्लिक मंच, डबवाली (रवि मोंगा)
चैत्र की अमावस्या 18 मार्च बुधवार सुबह 8:26 बजे लगेगी व 19 मार्च गुरुवार प्रात: 6:53 बजे उतरेगी। यह जानकारी देते हुए बिश्नोई सभा डबवाली के सचिव इंद्रजीत बिश्नोई ने बताया कि चैत्र की अमावस्या पर 18 मार्च को राजस्थान में फलौदी के पास स्थित जंभ सरोवर धाम व बिश्रोई समाज के अष्ट धामों में से एक धाम उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के पास लोदीपुर धाम में विशाल मेला लगेगा। बड़ी संख्या में समाजजन इन मेलों में भाग लेने के लिए पहुंचेंगे। वहीं, बिश्नोई धर्मशाला डबवाली में स्थित श्री गुरु जंभेश्वर मंदिर के प्रांगण में 18 मार्च को पुजारी श्री राम द्वारा 120 शब्दों की वेदमयी वाणी के साथ हवन यज्ञ किया जाएगा एवं अमृतमयी पाहल भी वितरित किया जाएगा। उन्होंने समाज के लोगों से अपील की कि जो लोग जंभ सरोवर धाम व लोदीपुर धाम नहीं जा रहे वे समयानुसार श्री गुरु जम्भेश्वर मन्दिर डबवाली में पहुंचकर हवन यज्ञ में शामिल होकर आहुति दें व अमृतमयी पाहल का प्रसाद ग्रहण करें। साथ ही अमावस्या के समयानुसार व्रत भी धारण करें।
लोदीपुर धाम में हर वर्ष लगता है विशाल मेला:
चैत्र की अमावस्या पर लोदीपुर धाम में हर वर्ष विशाल मेला लगता है। इंद्रजीत बिश्रोई ने लोदीपुर धाम के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि उक्त धाम मुरादाबाद-दिल्ली रेल मार्ग पड़ता है। करीब 540 वर्ष पूर्व गुरु जंभेश्वर भगवान की प्रिय भक्तिनी सुरजी देवी वर्ष में एक बार समराथल धोरा पर गुरु जांभोजी के दर्शनार्थ जाती थी। बहुत वर्ष बीत जाने के बाद जब वह बुजुर्ग हो गई तो समराथल धोरा जाने में असमर्थ थी। इस पर उसने गुरु जांभोजी को प्रार्थना की कि अब वह नहीं आ सकती इसलिए आप स्वयं आकर दर्शन दें। अपने प्रिय भक्त की श्रद्धा देखकर गुरू जांभोजी ने सुरजी देवी की पुकार सुनी व लोदीपुर जाकर उसे दर्शन दिए। सुरजीदेवी ने गुरूजांभो जी से लोदीपुर में अपनी कोई निशानी छोड़ जाने को भी कहा ताकि लोग उसकी बात का विश्वास करें कि भगवान खुद लोदीपुर आए थे। इस पर गुरु जांभोजी ने सुरजी देवी को खेजड़ी की सूखी लकड़ी दी और उसे जमीन में गाड़ने को कहा। जैसे ही यह लकड़ी हरी होने लगी तो लोग समझ गए कि भगवान यहां पर स्वयं आए थे। इस लकड़ी से पनपा खेजड़ी का वृक्ष आज भी लोदीपुर में मौजूद है। गुरु जांभेाजी द्वारा सुरजी देवी को खेजड़ी की लकड़ी देते समय उनके पैर का निशान भी जमीन में अंकित हो गया। बाद में श्रद्धालुओं ने वहां गुरु जंभेश्वर भगवान का मंदिर स्थापित करवाया और लोदीपुर एक धाम के रूप में स्थापित हो गया। मंदिर में गुरु जांभोजी के पैर का वह निशान भी मौजूद है जिसके दर्शन कर श्रद्धालुजन खुद को धन्य मानते हैं।
जंभ सरोवर धाम में भी मेला व स्नान:
इंद्रजीत बिश्नोई ने बताया कि बिश्नोई समाज का एकमात्र स्नान जंभ सरोवर धाम जो फलौदी के पास है वहां भी 18 मार्च को स्नान व मेला होगा । जम्भ सरोवर को गुरु जम्भेश्वर भगवान ने खुदवाया था, चैत्र मास की अमावस्या को लाखों की संख्या में देश भर समाज के लोग पहुंच कर स्नान करते हैं।
