पब्लिक मंच नेटवर्क, डबवाली (रवि मोंगा)
बिश्नोई सभा द्वारा डबवाली की चौटाला रोड पर स्थित बिश्नोई धर्मशाला में उमाबाई भात समारोह श्रद्धा एवं भक्ति के माहौल में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बिश्नोई समाज के लोग, महिलाएं, युवा और आसपास के गांवों से पहुंचे मंदिरों के पदाधिकारी शामिल हुए। आयोजन के दौरान भाई-बहन के प्रेम की कथा, भजन और गुरु भक्ति के रंग में लोग सराबोर रहे।
समारोह में पहुंचे कथावाचक धर्म प्रचारक रामकुमार भादू का बिश्नोई सभा पदाधिकारियों द्वारा फूलमालाओं से भव्य स्वागत किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जाम्भाणी साहित्य अकादमी बीकानेर के संगठन मंत्री अमरचंद बिश्नोई भीलवाड़ा थे, जबकि अध्यक्षता सदर थाना के एसएचओ शैलेन्द्र कुमार बिश्नोई ने की। सभा पदाधिकारियों ने समारोह में शामिल होने पर उनका भी अभिनंदन किया। सभी अतिथियों ने पाहल का प्रसाद ग्रहण कर मंदिर में माथा टेकते हुए आशीर्वाद लिया। इसके बाद गुरु जम्भेश्वर भगवान के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
गायक कलाकारों ने भगवान की आरती और वंदना प्रस्तुत कर भक्तिमय माहौल बना दिया। इसके बाद कथावाचक रामकुमार भादू ने उमाबाई भात की कथा का विस्तार से वर्णन किया। सभा सचिव इंद्रजीत बिश्नोई ने बताया कि कथा शुरू करने से पहले कथावाचक रामकुमार भादू ने बिश्नोई समाज के शिरोमणि संत ब्रह्मलीन स्वामी राजेन्द्रानंद जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके जीवन को याद करते हुए कथावाचक भावुक हो गए, जिससे पंडाल में मौजूद संगत की आंखें भी नम हो गईं और कुछ समय के लिए माहौल गमगीन हो उठा।
इसके बाद उमाबाई भात की कथा आरंभ हुई। कथावाचक ने बताया कि उमाबाई गुरु जम्भेश्वर भगवान की अनन्य भक्तिनी थीं। अक्षय तृतीया पर उनकी बेटी का विवाह था, लेकिन उमा बाई का कोई भाई नहीं था और उनके पिता वृद्धावस्था के कारण भात भरने में असमर्थ थे। उमाबाई ने कहा मुझे धन दौलत नहीं चाहिए केवल मेरे घर बेटी की शादी में आना है, लोकलाज रखनी है। उमाबाई के पिता जी ने कहा बेटी के घर खाली हाथ नहीं जाना चाहिए। सोच विचार करके उमाबाई गुरु जम्भेश्वर भगवान के पास गई । कथा के अनुसार, गुरु जम्भेश्वर भगवान ने उन्हें आश्वासन दिया कि वे भात भरने अवश्य आएंगे।
कथावाचक ने बताया कि विक्रमी संवत 1564 में अक्षय तृतीया के दिन गुरु जम्भेश्वर भगवान राजा-महाराजाओं के साथ नागौर के निकट रोटू गांव पहुंचे और उमाबाई को भात भरा। इस दौरान कथावाचक ने भाई-बहन के प्रेम, आस्था और सामाजिक परंपराओं से जुड़े प्रसंग सुनाकर संगत को भावुक कर दिया गया। कथा के बीच-बीच में रामकुमार भादू ने भात से जुड़े भजन भी प्रस्तुत किए, जिन्हें भक्तजन भी गुनगुनाते रहे। माहौल ऐसा बन गया मानो कोई विवाह समारोह चल रहा हो।
कथा में यह भी बताया गया कि गुरु जम्भेश्वर भगवान ने रोटू गांव में 3700 खेजड़ी वृक्ष लगवाए थे, जिनका बाग आज भी मौजूद है और गांव आज भी हराभरा है। अक्षय तृतीया के अवसर पर वहां हर वर्ष विशाल मेला भी लगता है।
मुख्य अतिथि अमरचंद बिश्नोई ने कहा कि ऐसे धार्मिक और सामाजिक आयोजन समाज को जागरूक करते हैं तथा नई पीढ़ी को अपने धर्म, संस्कृति और नियमों से जोड़ते हैं। उन्होंने युवाओं से नशे और कुसंगति से दूर रहकर ऐसे आयोजनों से जुड़ने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में हरिद्वार से पहुंचे स्वामी सदानंद जी महाराज और स्वामी विवेकानंद जी महाराज ने भजन प्रस्तुत कर संगत को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंत में सभा प्रधान कुलदीप कुमार जादुदा ने आए हुए मेहमानों को शॉल ओढ़ाकर और जंभसागर ग्रंथ भेंट कर सम्मानित किया। इसके बाद सभी ने भोजन प्रसाद ग्रहण किया और अपने-अपने गंतव्य के लिए रवाना हुए।
विशेष रूप से बीकानेर में खेजड़ी बचाओ आंदोलन के दौरान तीन दिन तक भूखे-प्यासे रहकर संघर्ष करने वाले शंकरलाल सीगड़ को सभा की ओर से स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। मंच संचालन सभा सचिव इंद्रजीत बिश्नोई ने किया जबकि कार्यक्रम संयोजक की जिम्मेदारी अमी लाल पटवारी ने निभाई। आयोजन में सभा सदस्य विनोद कुमार पटवारी, जीतराम पुनिया,विकास कुमार गोदारा, रामकुमार तरड़ के अलावा समाज के गणमान्य लोगों, भारी संख्या में महिलाओं और ग्रामीण क्षेत्रों से आए समाजजनों की उपस्थिति रही।


