पब्लिक मंच नेटवर्क, डबवाली (रवि मोंगा)
स्थानीय जैन स्थानक में चातुर्मास के पावन अवसर पर ज्योतिषाचार्य उपप्रवर्तक पूज्य गुरुदेव श्री सत्यप्रकाश जी महाराज एवं सेवाभावी गुरुदेव श्री समर्थ मुनि जी महाराज विराजमान हैं। चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन प्रात: 8 से 9 बजे तक आयोजित होने वाले प्रवचनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं। जैन परंपरा में चातुर्मास को तप, त्याग, संयम, स्वाध्याय और आत्मचिंतन का विशेष काल माना जाता है, जब साधु-संत एक ही स्थान पर रहकर धर्मोपदेश देते हैं और श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक साधना का अवसर मिलता है।
शनिवार को आयोजित प्रवचन में उपप्रवर्तक श्री सत्यप्रकाश जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य जीवन का वास्तविक उद्देश्य केवल भौतिक सुख-सुविधाएं जुटाना नहीं, बल्कि आत्मा का कल्याण करना है। उन्होंने कहा कि क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे कषाय ही मनुष्य के दुखों का मूल कारण हैं। इन विकारों पर संयम, सदाचार और धर्म साधना के माध्यम से ही विजय प्राप्त की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने व्यवहार में विनम्रता, सत्य, करुणा, क्षमा और सेवा के भाव को अपनाना ही सच्चा धर्म है। यदि व्यक्ति प्रतिदिन कुछ समय आत्मचिंतन, स्वाध्याय और प्रभु स्मरण के लिए निकाले तो उसका जीवन सकारात्मकता, शांति और संतोष से भर जाता है।
गुरुदेव ने कहा कि चातुर्मास आत्मपरिवर्तन का श्रेष्ठ अवसर है। इस पावन काल में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बुराइयों का त्याग कर अच्छे संस्कारों को अपनाने तथा अधिक से अधिक धर्म आराधना, तप, जप और सेवा कार्यों से जुड़ना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे परिवार सहित नियमित रूप से प्रवचनों में उपस्थित होकर धर्म का लाभ उठाएं और अपने जीवन को संस्कारवान एवं मूल्यनिष्ठ बनाएं।
प्रवचन के समापन पर श्रद्धालुओं ने गुरु वंदना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। जैन सभा प्रधान सुभाष जैन पप्पी ने बताया कि चातुर्मास अवधि में प्रतिदिन धार्मिक प्रवचन, आराधना एवं विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहभागिता कर रहे हैं। विशेष रूप से देवराज मोयल का परिवार भी प्रवचन सभा में मौजूद रहा। गुरुदेव के परम भक्त परिवार हांसी सिटी मजिस्ट्रेट हिमांशु चौहान और उनकी धर्मपत्नी जींद सिटी मजिस्ट्रेट मोनिका रानी भी विशेष तौर पर सभा में उपस्थित थे।


