पब्लिक मंच नेटवर्क, डबवाली । (रवि मोंगा)
जय श्री राम नगर नाट्यशाला की रामलीला में श्री हनुमान जी की पवित्र झांकी के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। भक्ति संगीत, आकर्षक कोरियोग्राफी और हनुमान जी के मनमोहक स्वरूप ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। हनुमान जी के स्वरूप में अभिनव सेठी नजर आए। इस मौके पर हजारों लोगों ने नतमस्तक होकर हनुमान जी के दर्शन किए और सुख-समृद्धि की कामना के साथ मन्नतें मांगीं। झांकी का पूजन पवन सोनी, प्रमोद सोनी, सुरेश गोयल, नरेश मित्तल, सुरेश मित्तल, हनी मोंगा, डेविड सचदेवा, बनवारी लाल बीकानेर वाले, प्यारे लाल सेठी, राजा सेठी, पंकज मोंगा और पार्षद सुमित अनेजा ने किया। नाट्यशाला की ओर से सभी दर्शकों में चूरमा प्रसाद वितरित किया गया। अनेक श्रद्धालुओं ने मन्नतें पूरी होने पर हनुमान जी को सवामनी प्रसाद का भोग लगवाया। झांकी के दौरान प्रसिद्ध रंगकर्मी संजीव शाद की शानदार कोरियोग्राफी पर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। इसमें 'मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया...' भक्ति गीत पर श्रद्धालु झूमने लगे और माहौल भावपूर्ण बन गया।
मीडिया प्रभारी रवि मोंगा, सचिव सुनील सेठी व अभिषेक झांब ने बताया कि रामलीला में श्रीराम-हनुमान मिलन, बाली-सुग्रीव युद्ध और बाली वध के प्रसंगों का मंचन किया गया। श्रीराम और हनुमान जी के मिलन के दृश्य में भक्ति, विश्वास और समर्पण की भावना उभरकर सामने आई। वहीं बाली और सुग्रीव के बीच संघर्ष के दृश्य ने दर्शकों को रोमांचित किया। बाली वध के प्रसंग में कलाकारों ने कथा के घटनाक्रम को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
डायरेक्टर नवनीत धमीजा व सोनू बब्बर ने बताया कि श्रीराम के रूप में अंशुल ग्रोवर, लक्ष्मण के रूप में पारुल मेहता और हनुमान जी के स्वरूप में अभिनव सेठी ने अभिनय किया। सुग्रीव की भूमिका सुरेंद्र कुमार, बाली की भूमिका रजत कुमार और जामवंत की भूमिका दीपक खरोड़ ने निभाई। अन्य कलाकारों में दीपांशु अरोड़ा, मोहित जैन, अयान सेठी और कमल मोहित जैन ने भी अपने अभिनय से मंचन को प्रभावशाली बनाया। मंच संचालन आचार्य रमेश सचेदवा, गुरदीप कामरा, रवि मोहन व वरदान झांब ने कुशलतापूर्वक किया।
27 साल तक लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले लाजपत राय वधवा से पुराना संवाद सुन तालियों से गूंजा पंडाल:
रामलीला की परंपरा को अपने अभिनय से वर्षों तक समृद्ध करने वाले करीब 80 वर्षीय लाजपत राय वधवा को सम्मानित किया गया। उन्होंने 27 वर्षों तक लक्ष्मण का किरदार निभाया था। सम्मान के दौरान उन्होंने रामलीला से जुड़ी यादें साझा कीं और लक्ष्मण के किरदार का एक संवाद सुनाया। वर्षों बाद उनके मुंह से वही संवाद सुनकर दर्शक भावुक हो उठे और तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया। यह क्षण रामलीला के मंच से जुड़ी पुरानी यादों और शहर की सांस्कृतिक विरासत का सजीव उदाहरण बना।


