पब्लिक मंच, डबवाली
- नरसिंह होय हिरणाकस मारयों, प्रहलादो रहियों शरण हमारी
होलिका दहन के दिन 2 मार्च को बिश्नोई समाज के लोग शोक रखेंगे क्योंकि इस दिन हिरण्यकश्यप के आदेश से होलिका द्वारा भक्त प्रह्लाद को जलती अग्नि में जलाकर मारना था। इसलिए इस दिन बिश्नोई समाज के लोग मिष्ठान आदि न बना कर सादा भोजन करते है व सुतक रखते है। भक्त पर जब भगवान की कृपा हुई तो 'नरसिंह होय हिरणाकस मारयों, प्रहलादो रहियों शरण हमारी' अर्थात भगत भगवान की शरण में आ जाता है तो उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता और अगले दिन सुबह जब भक्त प्रहलाद के बचने की सूचना मिलती है तो मंदिर के पुजारी द्वारा मंदिर में सर्वप्रथम प्रहलाद चरित्र की कथा करने उपरांत 120 शब्दों का पाठ कर हवन यज्ञ करके पाहल बनाया जाता है। इस दिन गांव के सबसे आदरणीय व बुजुर्ग व्यक्ति से पाहल बनाने की रस्म अदा करवाई जाती है। होली के दिन पर्यावरण संरक्षण के लिए पानी की बर्बादी न करके , एक दूसरे को नवम प्रणाम करके व कुशलक्षेम पूछकर ही समाज के लोग होली का त्यौहार मनाते हुए खुशी जाहिर करते हैं। इसलिए बिश्नोई समाज को प्रह्लाद पंथी भी कहा जाता है।
बिश्नोई सभा सचिव इन्द्रजीत बिश्नोई ने बताया कि विष्णु भगवान ने प्रह्लाद भक्त को वचन दिया था कि मैं कलयुग में जम्भेश्वर भगवान के रूप अवतार लेकर जीवों का उद्धार करूंगा। इसी प्रकार भगवान ने 17 लाख 28 हजार सतयुग प्रमाण सतयुग के पहरे में सोने का घाट, सोने का पाट, सोने का टका और सोने का कलश भक्त प्रह्लाद ने क्लश स्थापित कर पांच करोड़ जीवों का उद्धार किया। इसी प्रकार आगे चलकर 12 लाख 96 हजार त्रेता युग प्रमाण त्रेता युग के पहरे में रूपे का घाट, रूपे का पाट, रूपे का कलश और सोने का टका राजा हरिश्चन्द्र ने क्लश स्थापित कर 7 करोड़ जीवों का उद्धार किया। इसी प्रकार 8 लाख 64 हजार द्वापर युग प्रमाण द्वापर के पहरे में तांबे का घाट, तांबे का पाट, तांबे का कलश और रूपे का टका राजा युधिष्ठिर ने कलश की स्थापना कर 9 करोड़ जीवों का उद्धार किया। इसी प्रकार 4 लाख 32 हजार कलयुग प्रमाण कलयुग के पहरे में माटी का घाट, माटी का पाट और माटी का कलश तांबे का टका अंत करोड़ के मुखी श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान ने कलश की स्थापना कर 12 करोड़ जीवों का उद्धार कर बिश्नोई धर्म की स्थापना की। परम्परा अनुसार आज भी बिश्नोई समाज के मंदिरों में होली के दिन सुबह प्रहलाद चरित्र की कथा करने उपरांत हवन कर पाहल बनाया जाता है और बड़ी श्रद्धा के साथ पाहल ग्रहण कर होली के पर्व की खुशी मनाते है। बिश्नोई समाज में होली के पाहल का बड़ा महत्व है। दूर दराज के इलाकों से भी लोग बिश्नोई मंदिर में जाकर पाहल ग्रहण करते हैं।
उन्होंने बताया कि इस कड़ी में 3 मार्च को बिश्नोई मंदिर डबवाली व आसपास गांवों में स्थित सभी बिश्नोई मंदिरों में पाहल बनाने की रस्म अदा की जाएगी। उन्होंने बताया कि डबवाली स्थित गुरु जंभेश्वर मंदिर में 3 मार्च को सूर्योदय पश्चात पुजारी श्री राम द्वारा प्रहलाद चरित्र की कथा व हवन यज्ञ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मंदिर के प्रांगण में ज्यादा से ज्यादा संख्या में पहुच कर भक्त प्रह्लाद कथा का श्रवण कर हवन यज्ञ में आहुति देकर पाहल का प्रसाद ग्रहण करें। सचिव इंद्रजीत बिश्नोई ने समाज के लोगों से अपील की कि पाहल ग्रहण करने के बाद ही भोजन आदि लें।

