पब्लिक मंच, डबवाली (रवि मोंगा)
महाराणा
प्रताप महिला महाविद्यालय मंडी डबवाली में प्रबन्धक समिति के प्रधान डॉ. गिरधारी
लाल गर्ग के मार्गदर्शन व प्राचार्या डॉक्टर वनिता गुप्ता की अध्यक्षता में एक
दिवसीय मल्टीडिसीप्लिनरी नेशनल सेमिनार का आयोजन किया गया | “डिजिटल वैलनेस इन द
एरा ऑफ़ हाइपर कनेक्टिविटी अंडरस्टैंडिंग मीटीगेटिंग एंड ओवरकमिंग डिजिटल एडिक्शन”
विषय पर आयोजित यह सेमिनार उच्चतर शिक्षा विभाग पंचकूला द्वारा मान्यता प्राप्त है
जो कि महाविद्यालय के आइ क्यू ए सी सेल एवं महारानी झांसी एल्यूमिनी एसोसिएशन के
संयुक्त तत्वाधान द्वारा आयोजित किया गया | इसके आयोजक डॉ. गरिमा, डॉ. सुमन मोंगा,
श्रीमती पूजा, डॉ. निर्मला रानी थी | प्रबंधक समिति से उप प्रधान नरेश मित्तल
एवम् सुरेंद्र गर्ग विशेष रूप से उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि के द्वारा मां सरस्वती के
समक्ष दीप प्रज्वलित कर एवं शब्द गायन के साथ कार्यक्रम का आगाज किया गया | प्राचार्या
ने आए हुए अतिथियों का स्वागत किया | डॉ. सुमन मोंगा व डॉ. गरिमा ने सेमिनार के
विषय पर प्रकाश डालते हुए आए हुए अतिथियों का परिचय दिया | कार्यक्रम के की-नोट
स्पीकर प्रोफेसर सुरेंद्र सिंह कुंडू, कॉमर्स डिपार्टमेंट, सीडीएलयू सिरसा से थे |
इन्होंने कहा डिजिटल वेलनेस हमें यह सिखाती है कि तकनीक हमारी जिंदगी को आसान बनाए, न
कि हम तकनीक के गुलाम बन जाएँ। हमें अपने स्क्रीन टाइम को सीमित करना चाहिए, समय-समय
पर डिजिटल डिटॉक्स करना चाहिए और अपने परिवार व दोस्तों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय
बिताना चाहिए। जब हम जरूरत से ज्यादा मोबाइल फोन, सोशल मीडिया या गेम्स में समय बिताते
हैं, तो
इसका असर हमारी आँखों, दिमाग और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है।
नींद की कमी, तनाव, चिड़चिड़ापन और ध्यान की कमी जैसी
समस्याएँ बढ़ने लगती हैं। हमें यह समझना होगा कि तकनीक एक साधन है, लक्ष्य
नहीं। यदि हम तकनीक का सही और संतुलित उपयोग करें, तो यह हमारे विकास में सहायक बनेगी।
लेकिन यदि हम इसका दुरुपयोग करेंगे, तो यह हमारे स्वास्थ्य और भविष्य दोनों
को प्रभावित कर सकती है।
रिसोर्स पर्सन डॉ. सुरेंद्र सिंह संघा, प्राचार्य, दशमेश गर्ल्स कॉलेज, बादल ने कहा कि डिजिटल वेलनेस का मतलब तकनीक से दूर भागना नहीं है, बल्कि तकनीक के साथ संतुलन बनाकर चलना है। आज कई लोग घंटों तक स्क्रीन के सामने बैठे रहते हैं। परिवार के साथ समय बिताने के बजाय हम मोबाइल में व्यस्त रहते हैं। दोस्तों से आमने-सामने बात करने की बजाय हम चैटिंग को प्राथमिकता देते हैं। यह स्थिति हमारे रिश्तों को भी कमजोर बना रही है तकनीक ने हमें बहुत कुछ दिया है — ऑनलाइन शिक्षा, नई जानकारी, करियर के अवसर और दुनिया से जुड़ने का माध्यम।मोबाइल फोन आज हमारी जरूरत बन चुका है। इसके बिना जीवन की कल्पना करना कठिन है। यह हमें जानकारी, मनोरंजन और संचार की सुविधा देता है। लेकिन जिस सुविधा को हमने अपनाया, वही आज कई समस्याओं का कारण बनती जा रही है।
रिसोर्स पर्सन डॉक्टर त्रिलोक बंधु, प्राचार्य, खालसा कॉलेज ऑफ़ एजूकेशन, श्री मुक्तसर साहिब ने कहा कि हमारी वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में विद्यर्थियो में आलोचनात्मक सोच पैदा नही हो रही है और परिवार में डिजिटल तकनीक के प्रयोग के कारण हम सभी अलगाव और पृथकता का जीवन जीने लगे है | हम जीवन जीने की कला के प्रति भी जागरूक नही है | आज के इस डिजिटल युग में हमें तकनीक को सोच समझ कर एवम उद्देश्यपूर्ण तरीके से प्रयोग करना चाहिए | आज के इस परिदृश्य में माता पिता को बच्चों को जीवन का मूल्य बताने एवम् उनकी बातों को सुनने की आवश्यकता है ताकि हमारी भावी पीढ़ी अधिक संवेदनशील बने एवम् जीवन मूल्यों को पहचाने | द्वितीय सत्र में चेयरपर्सन डॉ. राकेश सिंगला ऍम.आर.एस.पी.टी., बठिंडा थे | इस सत्र में विभिन्न प्रतिभागियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किये |ऑनलाइन टेक्निकल सत्र के अध्यक्ष शिराज खुराना थे | इसमें एक सौ पच्चीस प्रतिभागियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किये जिसमे से कुछ प्रतिभागी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े | इस कार्यक्रम में वित्तिय सहायता पंजाब नेशनल बैंक के सौजन्य से भी प्राप्त हुई | सेमिनार में उपस्थित विशिष्ट अतिथियों एवम् विभिन्न स्कूलों व कॉलेजों से आए हुए प्राचार्यों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया | कार्यक्रम के सफल आयोजन में श्रीमती अंजू बाला, श्रीमती अनु बाला, श्रीमती पूनम बब्बर, डॉ. पदमा बरेटो, डॉ. सुमन देवी, डॉ. मनजीत, डॉ. उषा, डॉ. सुमन, श्रीमती सुमन बाला का विशेष योगदान रहा | सेमिनार की तकनीकी टीम में श्रीमती प्रियंका, श्री ओमकार गर्ग, श्रीमती मुक्ता पारीक की विशेष भूमिका रही | वरिष्ठ नागरिक संघ के सदस्य एवम् अन्य गणमान्य जनों ने भी कार्यक्रम में उपस्थित होकर कार्यक्रम कि शोभा बढ़ाई |

