हरियाणा सरकार द्वारा मंडियों में फसल बेचने के लिए लागू किए गए बायोमेट्रिक, ट्रैक्टर नंबर प्लेट और फोटो जैसे नए नियमों को लेकर विवाद गहरा गया है। भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के लीगल एडवाइजर व किसान नेता एडवोकेट खुशदीप सिंह सरां ने इन नियमों को पूरी तरह अवैध, असंवैधानिक और किसान विरोधी करार दिया है।
जारी बयान में सरां ने कहा कि इन नियमों से संबंधित कोई विधिवत नोटिफिकेशन गजट में प्रकाशित नहीं किया गया है, जिससे साफ है कि इन्हें बिना कानूनी आधार के लागू करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने इसे किसानों के मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन बताते हुए कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के खिलाफ है और कानूनी प्रक्रिया को दरकिनार कर जारी किया गया 'तुगलकी फरमान' है।
उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर भी ये नियम पूरी तरह अव्यावहारिक हैं। अधिकांश किसान अपनी फसल एक से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में लाते हैं या पड़ोसियों के साधनों का भी सहारा लेते हैं। ऐसे में हर बार बायोमेट्रिक और वाहन की अनिवार्यता व्यवहारिक नहीं है। बुजुर्ग व महिला किसानों के लिए यह प्रक्रिया और भी कठिन साबित होगी।
खुशदीप सरां ने यह भी सवाल उठाया कि यदि किसी किसान का बायोमेट्रिक फेल हो जाता है, तो सरकार ने कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं दी है और न ही किसी अधिकारी को मैन्युअल प्रक्रिया के लिए अधिकृत किया गया है। इसे उन्होंने प्रशासनिक मनमानी करार दिया।
उन्होंने कहा कि किसानों की जमीन का रिकॉर्ड पहले से ही पटवारी द्वारा आधार से सत्यापित है, ऐसे में दोबारा बायोमेट्रिक लेने का कोई औचित्य नहीं बनता। उन्होंने आरोप लगाया कि धान सीजन के दौरान बीकेयू चढूनी द्वारा पकड़े गए चावल के ट्रकों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जबकि बड़े स्तर पर घोटालों में प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता रही।
सरां ने कहा कि सख्ती शैलर मालिकों, आढ़तियों और अधिकारियों पर होनी चाहिए थी, लेकिन इसके बजाय पूरा बोझ किसानों पर डाला जा रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि बड़े स्तर पर बायोमेट्रिक डेटा एकत्र करने से साइबर फ्रॉड का खतरा भी बढ़ेगा, जबकि सुप्रीम कोर्ट पहले ही बिना ठोस कारण के बायोमेट्रिक डेटा लेने पर चिंता जता चुका है।
-नोटिफिकेशन बिना गजट लागू करने का आरोप, हाईकोर्ट जाने की चेतावनी
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मंडी व्यवस्था को कमजोर कर निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने की दिशा में काम कर रही है। बीकेयू चढूनी ने साफ चेतावनी दी है कि यदि इस आदेश को तुरंत वापस नहीं लिया गया तो संगठन आंदोलन का रास्ता अख्तियार करेगा और जरूरत पड़ी तो हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा। अंत में उन्होंने किसानों से अपील की कि वे इस बायोमेट्रिक प्रक्रिया से दूरी बनाए रखें और अपने अधिकारों के लिए एकजुट रहें।
