पब्लिक मंच नेटवर्क, डबवाली (रवि मोंगा)
जाम्भाणी साहित्य अकादमी, बीकानेर तथा बिश्नोई मंदिर कमेटी, गांव गंगा के संयुक्त तत्वावधान में बिश्नोई रत्न चौधरी सहीराम धारणिया की स्मृति में आयोजित जाम्भाणी संस्कार शिविर का शनिवार को शुभारंभ हुआ। शिविर का आरंभ योग गुरु ओमप्रकाश तरड़ द्वारा बच्चों को योगाभ्यास करवाने से हुआ। इसके बाद स्वामी विवेकानंद ने हवन एवं पाहल की विधि-विधान सहित विस्तृत जानकारी दी।
उद्घाटन सत्र में सेवानिवृत्त जिला शिक्षा अधिकारी संत कुमार मुख्य अतिथि रहे, जबकि सेवानिवृत्त एडीसी इन्द्रपाल तरड़ ने अध्यक्षता की। विशिष्ट अतिथि के रूप में सेवानिवृत्त तहसीलदार जगदीश चंद्र तरड़ उपस्थित रहे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर शिविर का शुभारंभ किया। इस दौरान शिविर प्रभारी अध्यापक रंगलाल बिश्नोई, अकादमी के जिला प्रभारी इन्द्रजीत बिश्नोई, मंदिर कमेटी अध्यक्ष सुभाषचंद्र तरड़ तथा मंच संचालक चन्द्रमोहन गिला भी साथ थे। इस अवसर पर बिश्नोई रत्न चौ. सहीराम धारणिया को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष सुभाषचंद्र तरड़, सचिव अनिल कुमार एवं अन्य सदस्यों ने अतिथियों का फूल मालाएं पहनाकर स्वागत किया।
मुख्य अतिथि संत कुमार ने बच्चों को नैतिक मूल्यों का महत्व बताते हुए कहा कि माता-पिता और बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए तथा उनके अनुभवों से सीख लेकर जीवन में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंच पर विराजमान सभी अतिथि अपने अच्छे संस्कारों, शिक्षा और मेहनत के बल पर उच्च पदों तक पहुंचे हैं। बच्चों को भी शिविर में दिए जा रहे संस्कारों को आत्मसात कर अपने परिवार, समाज और देश का नाम रोशन करना चाहिए। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि प्लास्टिक का कम से कम उपयोग करना चाहिए, क्योंकि इससे पर्यावरण प्रदूषित होता है। यदि जल, वायु और धरती को स्वच्छ नहीं रखा गया तो आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। इसलिए शिक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी अत्यंत आवश्यक है।
सेवानिवृत्त तहसीलदार जगदीश चंद्र तरड़ ने अपने अनुभव साझा करते हुए आयोजन के लिए मंदिर कमेटी का आभार व्यक्त किया। शिविर प्रभारी रंगलाल बिश्नोई ने भजनों के माध्यम से बच्चों को अच्छे संस्कार अपनाने तथा अनुशासित जीवन जीने की प्रेरणा दी। उन्होंने बच्चों को व्यवस्थित ढंग से बैठने और शिविर की गतिविधियों में नियमित रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
अध्यक्षीय संबोधन में सेवानिवृत्त एडीसी इन्द्रपाल तरड़ ने कहा कि गुरु जम्भेश्वर भगवान के 29 नियम केवल धार्मिक नहीं बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने बच्चों से जीवों पर दया करने, हरे पेड़ों की रक्षा करने, नशे से दूर रहने, स्वच्छता अपनाने तथा नियमित दिनचर्या का पालन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि केवल नियम याद करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें जीवन में उतारना भी आवश्यक है।
स्वामी विवेकानंद ने गुरु जम्भेश्वर भगवान के जन्म, बाल्यकाल और उनकी शिक्षाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। वहीं अध्यापक संदीप कुमार गोदारा ने बच्चों से संस्कारित, अनुशासित और जिम्मेदार नागरिक बनने का आह्वान किया। शिविर में बच्चों के बैठने एवं नाश्ते की उत्तम व्यवस्था की गई। पहले दिन कुल 75 बच्चों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का संचालन चन्द्रमोहन गिला ने किया। इस अवसर पर बिश्नोई सभा डबवाली के सदस्य रामकुमार तरड़, बहादरराम तरड़, राधेश्याम, ओमप्रकाश, नरेश राहड़, पवन कुमार तरड़, सुधीर माल, पटेल माल, पवन तरड़, पुजारी विनोद कुमार सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

