पब्लिक मंच नेटवर्क, डबवाली (रवि मोंगा)
डबवाली के प्रसिद्ध रंगकर्मी, एंकर और मोटिवेशनल स्पीकर संजीव शाद ने राष्ट्रीय सांस्कृतिक मंचों पर अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराते हुए न केवल अपनी कला का लोहा मनवाया, बल्कि डबवाली की पहचान को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तत्वावधान में उत्तर क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र (एनजेडसीसी), पटियाला द्वारा आयोजित एक भारत, श्रेष्ठ भारत सांस्कृतिक यात्रा के दौरान संजीव शाद अपनी ओजपूर्ण मंच संचालन शैली, प्रभावशाली प्रस्तुतियों और सामाजिक संदेशों के कारण पूरे आयोजन के प्रमुख आकर्षण बने रहे।
13 जून को पठानकोट स्थित भारतीय सेना के आर्मी कैंप से शुरू हुई यह राष्ट्रीय सांस्कृतिक यात्रा जम्मू, रामबन, श्रीनगर, द्रास, कारगिल और लेह-लद्दाख होते हुए हिमाचल प्रदेश के केलांग और मनाली तक पहुंची। देशभर से आए कलाकारों के बीच संजीव शाद ने प्रत्येक कार्यक्रम में अपने प्रभावशाली मंच संचालन से दर्शकों को बांधे रखा। भारतीय सेना के जवानों, विद्यार्थियों और स्थानीय नागरिकों के बीच उन्होंने देशभक्ति, सामाजिक जागरूकता और सकारात्मक सोच से जुड़े संदेशों को बेहद प्रभावी अंदाज में प्रस्तुत किया।
लेह में आयोजित सिंधु दर्शन महोत्सव और सिंधु कुंभ के दौरान लगातार पांच दिनों तक चले सांस्कृतिक आयोजनों में भी संजीव शाद की मंच संचालन शैली को खूब सराहा गया। इसके बाद हिमाचल प्रदेश के केलांग में स्थानीय ग्रामीणों के साथ सांस्कृतिक संवाद स्थापित किया गया। यात्रा के अंतिम पड़ाव मनाली स्थित मनु रंगशाला में आयोजित भव्य सांस्कृतिक संध्या में भी उन्होंने अपनी ऊर्जा और प्रभावशाली प्रस्तुति से माहौल को देशभक्ति और उत्साह से भर दिया।
पूरी यात्रा के दौरान संजीव शाद ने केवल कार्यक्रमों का संचालन ही नहीं किया, बल्कि शिक्षा, नशा मुक्ति, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सद्भाव और सकारात्मक सोच जैसे विषयों को अपनी विशिष्ट शैली में प्रस्तुत कर हजारों लोगों तक सार्थक संदेश पहुंचाए। उनकी ओजपूर्ण देशभक्ति शायरियां, प्रेरक प्रसंग, सहज हास्य और संवाद शैली ने हर आयु वर्ग के दर्शकों को प्रभावित किया।
इस सांस्कृतिक यात्रा में महाराष्ट्र की लावणी, राजस्थान का कालबेलिया, पंजाब का भांगड़ा, मणिपुर का रास, ओडिशा का गोटी पुआ, हिमाचल की कुल्लू नाटी, जम्मू का डोगरी, कश्मीर का धमाली और लद्दाख का स्पो नृत्य सहित देश की विविध लोक कलाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस दौरान पंजाब के सुप्रसिद्ध लोक गायक मानक अली ने लोकगीतों और सूफियाना गायकी की यादगार प्रस्तुतियां दी। इन प्रस्तुतियों के बीच संजीव शाद ने अपनी दमदार आवाज मेें विभिन्न संस्कृतियों को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया।
संजीव शाद ने कहा कि डबवाली के लोगों का स्नेह और विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है, जिसके बल पर वे हर मंच पर अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास करते हैं। मैं जहां भी जाता हूं, अपने शहर की पहचान, उसकी संस्कृति और सकारात्मक सोच को साथ लेकर चलता हूँ। उन्होंने संस्कृति मंत्रालय और उत्तर क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन भारतीय लोक संस्कृति को जीवंत बनाए रखने के साथ-साथ कलाकारों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहे हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से न केवल भारत की सांस्कृतिक धरोहर नई पीढ़ी तक पहुंच रही है, बल्कि देशभर के हजारों लोक कलाकारों, संगीतकारों, रंगकर्मियों और मंच कलाकारों को सम्मानजनक मंच तथा रोजगार के अवसर भी प्राप्त हो रहे हैं।
वरच्युस क्लब सहित डबवाली के कला प्रेमियों ने व्यक्त की प्रसन्नता:
संजीव शाद की इस उपलब्धि पर वरच्युस क्लब इंडिया सहित डबवाली के कला प्रेमियों ने प्रसन्नता व्यक्त की। क्लब के जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) भारत भूषण वधवा ने कहा कि संजीव शाद ने राष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा, सकारात्मक सोच और प्रभावशाली कला शैली से डबवाली का नाम पूरे देश में गौरवान्वित किया है। यह उपलब्धि पूरे शहर के लिए गर्व का विषय है तथा युवा कलाकारों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी। वरच्युस क्लब इंडिया के संस्थापक केशव शर्मा, प्रधान डॉ. बीर चंद गुप्ता तथा प्रबंधक समिति के सभी पदाधिकारियों और सदस्यों ने संजीव शाद को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। क्लब पदाधिकारियों ने कहा कि संजीव शाद ने अपनी प्रतिभा, समर्पण और सकारात्मक सोच के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर डबवाली का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि वे भविष्य में भी इसी प्रकार भारतीय संस्कृति के संवाहक बनकर देशभर में डबवाली का नाम रोशन करते रहेंगे।
