पब्लिक मंच नेटवर्क, डबवाली (रवि मोंगा)
जंडवाला बिश्नोईया में बिश्नोई रत्न चौधरी सहीराम जी धारणिया की स्मृति में आयोजित पांच दिवसीय जाम्भाणी संस्कार शिविर का शनिवार को समापन हो गया। समारोह में आदमपुर से पधारे राजकीय महाविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. कृपाराम बिश्नोई मुख्य अतिथि थे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता कैप्टन जयसिंह बिश्नोई ने की। बिश्नोई सभा डबवाली के अध्यक्ष कुलदीप कुमार जादूदा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत योगगुरु ओमप्रकाश तरड़ द्वारा बच्चों को योगाभ्यास करवाने से हुई। इसके बाद शिविर प्रभारी रामसिंह कस्वा ने बच्चों से 120 शब्दों के उच्चारण के साथ हवन करवाया तथा पाहल तैयार कर उसकी विधि और महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। ज्योति प्रज्ज्वलन एवं भगवान की प्रार्थना के साथ मुख्य कार्यक्रम आरंभ हुआ।
सिरसा जिला प्रभारी इन्द्रजीत बिश्नोई ने बताया कि मंदिर कमेटी के अध्यक्ष शंकरलाल सीगड़ ने सभी अतिथियों का फूलमालाओं से स्वागत किया, जबकि गांव की सरपंच अनुजा थापन ने ग्रामवासियों की ओर से अतिथियों का अभिनंदन किया। मुख्य अतिथि डॉ. कृपाराम बिश्नोई ने अपने संबोधन में कहा कि संस्कार शिविर बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। ऐसे शिविरों के माध्यम से बच्चों को जाम्भाणी दर्शन, नैतिक मूल्य, आचार-विचार तथा सामाजिक जिम्मेदारियों की शिक्षा प्राप्त होती है।
उन्होंने गुरु जम्भेश्वर भगवान की वाणी के प्रसिद्ध शब्द 'जद पवन न होता, पाणी न होता, धरती आकाश पाताल न होता...' का अर्थ समझाते हुए कहा कि जब धरती, आकाश, वायु, पानी कुछ नहीं था, उस समय मैं था और आगे भी रहूंगा। इस चराचर जगत का पालन हार मैं ही हूं। गुरु जम्भेश्वर भगवान ने सृष्टि, प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश सदियों पहले दिया था। उन्होंने कहा कि प्रकृति, वनस्पति और जीव-जंतुओं की रक्षा करना ही सच्ची मानवता है तथा पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले कार्यों से बचना चाहिए।
डॉ. कृपाराम ने कहा कि सिरसा जिले में एक साथ चार स्थानों पर संस्कार शिविरों का आयोजन होना समाज के लिए गौरव की बात है। इससे बच्चों को अपने क्षेत्र के निकट ही संस्कार शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलता है। उन्होंने बच्चों से आह्वान किया कि शिविर में सीखी गई बातों को अपने जीवन में उतारें, गुरु वाणी का अर्थ समझकर उसका अभ्यास करें और एक अच्छे वक्ता तथा जिम्मेदार नागरिक बनने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि गुरु जम्भेश्वर भगवान के 29 नियमों में सरल, सुखी और अनुशासित जीवन जीने की कला निहित है। यदि व्यक्ति काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार और ईर्ष्या जैसे दुर्गुणों का त्याग कर इन नियमों को जीवन में अपनाता है तो वह सफलता और सम्मान की ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।
अध्यक्षीय संबोधन में कैप्टन जयसिंह बिश्नोई ने बच्चों को समाज का 'हीरे-मोती' बताते हुए कहा कि संस्कार शिविर में भाग लेने वाले बच्चे भविष्य में समाज और राष्ट्र का नाम रोशन करेंगे।
समारोह के दौरान जाम्भाणी परीक्षा में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले बच्चों को प्रमाण-पत्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि, अध्यक्ष, विशिष्ट अतिथि को भी शॉल ओढ़ाकर एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। समाजसेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष विक्रम थापन व गांव के सेवादारों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया गया। अध्यक्ष विक्रम थापन ने पर्यावरण एवं पक्षी संरक्षण का संदेश देते हुए सभी बच्चों, मुख्य अतिथि तथा अन्य अतिथियों को पक्षियों के लिए एक-एक घोंसला भेंट किया। उन्होंने सभी से इन घोंसलों को उचित एवं सुरक्षित स्थानों पर लगाने का आग्रह किया, ताकि पक्षियों को आश्रय मिल सके और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समाज में जागरूकता बढ़े।
इस अवसर पर हरियाणा गौशाला सेवा संघ के जिला अध्यक्ष एडवोकेट योगेश कुमार, कालुआना गौशाला के अध्यक्ष ओमप्रकाश ज्याणी, जंडवाला गौशाला के अध्यक्ष इन्द्र कुमार, सतपाल सीगड़, भूपसिंह सीगड़, बिश्नोई सभा डबवाली के सदस्य जीतराम पूनिया, विकास कुमार गोदारा, लॉर्ड शिवा कॉलेज सिरसा के महानिदेशक देशकमल सीगड़, प्रेमकुमार, कमलेश राहड़, महावीर खीचड़, करणी सिंह सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
मंच संचालन अकादमी के जिला प्रभारी इन्द्रजीत बिश्नोई किया। उन्होंने सफल आयोजन एवं उत्कृष्ट व्यवस्थाओं के लिए मंदिर कमेटी का आभार व्यक्त किया। वहीं गांव की कमेटी ने अगले वर्ष भी जाम्भाणी संस्कार शिविर आयोजित करने का प्रस्ताव रखा। कैप्टन जयसिंह बिश्नोई ने सभी बच्चों को 100-100 रुपये प्रोत्साहन राशि(कुल 6 हजार रुपए) प्रदान की, जिसके लिए उन्होंने कुल 6 हजार रुपये का सहयोग दिया। वहीं डॉ. प्रमोद कड़वासरा, ग्रामवासियों, नीशू सीगड़, रामस्वरूप, महावीर खीचड़, देशकमल नंबरदार, इन्द्रजीत बिश्नोई, अंग्रेज तथा बिश्नोई सभा डबवाली की ओर से लंगर व्यवस्था के लिए लगभग 4 हजार रुपये का सहयोग प्रदान किया गया।
इन्द्रजीत बिश्नोई ने बताया कि गांव खैरेकां (खैरेकां) के आरपी स्कूल में 9 जून से 13 जून तक आयोजित जाम्भाणी संस्कार शिविर का भी समापन हो गया। शिविर प्रभारी सांचौर से पधारे सेवानिवृत्त अध्यापक हरिराम खीचड व अकादमी के सदस्य डा मनीराम सहारण ने शिविर का संचालन बहुत बढिया तरीके से किया।

