जाम्भाणी संस्कार शिविर में बच्चों को दिए संस्कार, स्वास्थ्य और शिक्षा के सूत्र
डबवाली
जाम्भाणी साहित्य अकादमी, बीकानेर तथा श्री गुरु जम्भेश्वर मंदिर, जंडवाला बिश्नोईयां के संयुक्त तत्वावधान में बिश्नोई रत्न चौधरी सहीराम धारणिया की स्मृति में 9 जून से 13 जून तक आयोजित जाम्भाणी संस्कार शिविर का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान की आरती के साथ किया गया। इससे पूर्व बच्चों से हवन-यज्ञ करवाया गया।
अकादमी के सिरसा जिला प्रभारी इन्द्रजीत बिश्नोई ने बताया कि शिविर में मुख्य अतिथि हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद कुमार कड़वासरा थे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर के पूर्व डीन एवं ग्रामोथान विद्यापीठ, संगरिया के प्राचार्य डॉ. सुरेन्द्र कुमार सहारण ने की। इस अवसर पर शिविर प्रभारी रामसिंह कसवा, अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा के उपाध्यक्ष, गांव की सरपंच श्रीमती अनुजा बिश्नोई, सरपंच प्रतिनिधि जयसिंह थापन, गौशाला उपाध्यक्ष सतपाल सीगड़, करणी सिंह घुवाड़, महावीर खीचड़ तथा बिश्नोई समाज सेवा समिति के अध्यक्ष विक्रम कुमार थापन सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
श्री गुरु जम्भेश्वर मंदिर जंडवाला बिश्नोईया के अध्यक्ष शंकरलाल सीगड़ ने सभी अतिथियों का फूलमालाओं से स्वागत किया। इस अवसर पर सोमप्रकाश सीगड़ ने बिश्नोई रत्न चौधरी सहीराम धारणिया के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जीवन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि युवाओं को उनके संघर्ष, शिक्षा और समाजसेवा से प्रेरणा लेकर जीवन में आगे बढ़ना चाहिए तथा अपने माता-पिता और समाज का नाम रोशन करना चाहिए।
मुख्य अतिथि डॉ. प्रमोद कुमार कड़वासरा ने बच्चों को संस्कारवान बनने का संदेश देते हुए स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि सुबह जल्दी उठना, नियमित स्नान करना, सात्विक भोजन ग्रहण करना तथा भूख से कम भोजन करना स्वस्थ जीवन की कुंजी है। बासी भोजन से परहेज करने और अनुशासित दिनचर्या अपनाने से जीवन में सफलता प्राप्त की जा सकती है।
अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. सुरेन्द्र कुमार सहारण ने कहा कि गुरु जम्भेश्वर भगवान दूरदर्शी वैज्ञानिक चिंतन वाले महापुरुष थे। उनकी शिक्षाएं आज भी मानव जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। उन्होंने कहा कि चौधरी सहीराम धारणिया के जीवन पर शोध कार्य करवाया जाएगा। व्यक्ति विशेष पर बहुत कम शोध हुए हैं। स्वामी विवेकानंद और स्वामी केशवानंद जैसे महापुरुषों पर शोध हुए हैं, इसलिए वे चौधरी सहीराम धारणिया के जीवन एवं योगदान पर भी शोध करवाएंगे। इस घोषणा पर आयोजन समिति ने उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल करने के लिए आयोजकों का आभार व्यक्त किया।
सरपंच श्रीमती अनुजा बिश्नोई ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए आयोजन समिति को सफल आयोजन के लिए बधाई दी। शिविर प्रभारी रामसिंह कसवा ने बच्चों को गुरु जम्भेश्वर भगवान के जीवन, बाल लीलाओं एवं उनके सिद्धांतों से अवगत करवाया। उन्होंने जन्म घुटी के महत्व को बताते हुए कहा कि संस्कारवान महिलाओं के हाथों से दी गई जन्म घुटी बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। रामसिंह कस्वा ने चौधरी सहीराम धारणिया के सामाजिक योगदान पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वे अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा के अध्यक्ष होने के साथ-साथ अखिल भारतीय गुरु जम्भेश्वर सेवक दल के आजीवन संरक्षक भी रहे। उन्होंने बताया कि गुरु जम्भेश्वर सेवक दल का गठन 8 फरवरी 1944 को अबोहर में आयोजित अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा के अधिवेशन में चौधरी सहीराम धारणिया के नेतृत्व में हुआ था तथा उसी वर्ष इसे लाहौर से पंजीकृत करवाया गया था।
लॉर्ड शिवा कॉलेज के महानिदेशक देशकमल सीगड़ ने कहा कि युवाओं को अपने बुजुर्गों के अनुभवों और आदर्शों से प्रेरणा लेनी चाहिए। उनके मार्गदर्शन से ही समाज और राष्ट्र का उज्ज्वल भविष्य निर्मित हो सकता है।
कार्यक्रम के अंत में आयोजन समिति द्वारा सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। शिविर में अध्यापक पवन कुमार, विक्रम थापन, महावीर खीचड़, करणी सिंह घुवाड़ सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने सेवा कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मंच संचालन अकादमी के सिरसा जिला प्रभारी इन्द्रजीत बिश्नोई ने किया।
शिविर में कुल 55 बच्चों ने भाग लिया। बच्चों के लिए कमलेश राहड़ उर्फ बाठिया की ओर से दूध तथा नीशू सीगड़, डबवाली की ओर से जलेबी और बिस्कुट वितरित किए गए। अंत में मंदिर समिति के अध्यक्ष शंकरलाल सीगड़ ने सभी अतिथियों, सहयोगियों एवं ग्रामीणों का आभार व्यक्त किया।

